हलषष्ठी 2025: बलराम जयंती की तारीख, पूजा-विधि और महत्व

✨ हलषष्ठी 2025 – भगवान बलराम की आराधना का महापर्व

hal shashthi

भगवान बलराम
, जिन्हें भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है, का जन्मोत्सव हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है। अलग-अलग पंचांगों में इस तिथि का मास अलग बताया जाता है—पूर्णिमांत के अनुसार यह भाद्रपद में आती है, जबकि अमांत के अनुसार श्रावण में—परंतु तिथि एक ही रहती है। यह पर्व हलषष्ठी, हरछठ, ललही छठ या बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से व्रत रखती हैं। बलराम जी को हलधर कहा जाता है, क्योंकि उनका प्रमुख शस्त्र हल था। व्रतधारी इस दिन हल से जोते गए अनाज का सेवन नहीं करते।

📅 2025 में कब है हलषष्ठी

वर्ष 2025 में हलषष्ठी का पर्व 14 अगस्त (गुरुवार) को मनाया जाएगा।

  • षष्ठी तिथि प्रारंभ: 14 अगस्त, सुबह 4:23 बजे

  • षष्ठी तिथि समाप्त: 15 अगस्त, सुबह 2:07 बजे उदया तिथि के आधार पर व्रत 14 अगस्त को ही रखा जाएगा। यह त्योहार रक्षाबंधन के छह दिन बाद और जन्माष्टमी से पहले आता है।

🙏 बलराम जी के स्वरूप व मान्यता

श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलराम जी को ब्रज के राजा के रूप में भी पूजा जाता है। वे आदिशेष के अवतार हैं—वही शेषनाग जिन पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम करते हैं। उनके अन्य नाम बलदेव, बलभद्र और हलायुध हैं। वे मल्लयुद्ध और गदायुद्ध में निपुण थे।

उत्तर भारत में यह दिन हलषष्ठी या ललही छठ, ब्रज क्षेत्र में बलदेव छठ, और गुजरात में रांधण छठ के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन हल और बैलों की भी पूजा होती है।

🌸 विशेष पूजन और उत्सव

मथुरा के बलदेव कस्बे के श्री दाऊजी महाराज मंदिर में इस अवसर पर भव्य पूजा और अभिषेक होता है। बलराम जी को विशेष पोशाक, हीरे-जवाहरात और स्वर्णाभूषणों से सजाया जाता है। मंदिर में दधिकाधौं उत्सव के अंतर्गत दही, माखन, हल्दी और केसर का मिश्रण भक्तों पर उड़ाया जाता है और साथ ही फल, खिलौने, वस्त्र व धन लुटाया जाता है।

🪔 हलषष्ठी व्रत की विधि

  1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, संभव हो तो महुआ की दातून करें।

  2. पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर चौकी पर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की मूर्ति या चित्र रखें।

  3. पूजा सामग्री: चंदन, फूल, माला, रोली, अक्षत, दूर्वा, तुलसी, फल, मिठाई, महुआ और पसई का चावल

  4. संकल्प लें कि यह व्रत संतान की दीर्घायु और सुख के लिए है।

  5. भैंस के दूध से बना दही-घी अर्पित करें; गाय का दूध न लें।

  6. हलषष्ठी कथा सुनें/पढ़ें और आरती करें।

  7. आंगन या छत पर हलषष्ठी वाली घास लगाएं।

🚫 व्रत के नियम

  • हल से जोते खेत के अनाज (जैसे गेहूं, चावल) का सेवन न करें।

  • गाय का दूध, दही और घी त्यागकर भैंस से बने उत्पाद लें।

  • साग-सब्जियां न खाएं और हल से जुते खेत पर न चलें।

  • दिनभर सात्विक आचरण रखें और बलराम जी का स्मरण करें।

🌟 व्रत का महत्व व लाभ

मान्यता है कि यह व्रत संतान को रोग, भय और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है। निःसंतान दंपतियों के लिए भी यह व्रत फलदायी है। इससे घर-परिवार में शांति और समृद्धि आती है। बलराम जी शक्ति और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं।

🎭 मेले और सांस्कृतिक आयोजन

मथुरा का देवछठ मेला, जो 162 वर्षों से लगता आ रहा है, इस अवसर का प्रमुख आकर्षण है। इसमें ध्वजारोहण, रागिनी गायन, कुश्ती-दंगल, नाट्य प्रदर्शन और शोभायात्राएं होती हैं। वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में बलराम जयंती पर अभिषेक, छप्पन भोग और गोवंश—विशेषकर बैलों—का पूजन भी किया जाता है।

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