Basant Panchami Poem In Hindi, Basant Ritu Poem In Hindi Language

Basant Panchami Poem In Hindi, Basant Ritu Poem In Hindi Language


Here you can see some of the best hindi poems on Basant Panchami. These Basant Panchami poem in hindi tells about the Basant panchami festival which is regarded as the Queen of seasons, then a short hindi poem on Basant Panchami, then 
Chali Chali Re Patang song from the old classic Bhabhi movie. You can also see a great hindi poem "Veeron Ka Kaisa Ho Vasant" on Basant Panchami by Subhadra Kumari Chauhan and one of the best Basant Panchami poems in hindi language "Rituon ki ritu Basant" by Sumitranandan Pant.

RITUYON KEE RAANI( Hindi poem on Vasant Panchami/Basant Panchami)


धरा पे छाई है हरियाली
खिल गई हर इक डाली डाली
नव पल्लव नव कोपल फुटती
मानो कुदरत भी है हँस दी

छाई हरियाली उपवन मे
और छाई मस्ती भी पवन मे
उडते पक्षी नीलगगन मे
नई उमन्ग छाई हर मन मे

लाल गुलाबी पीले फूल
खिले शीतल नदिया के कूल
हँस दी है नन्ही सी कलियाँ
भर गई है बच्चो से गलियाँ

देखो नभ मे उडते पतन्ग
भरते नीलगगन मे रन्ग
देखो यह बसन्त मसतानी
आ गई है ऋतुओ की रानी

Hokar Magan Aaya Hai Basant
Short Hindi Poem for Basant Panchami Festival by Vivel Hirde


Hokar Magan Aaya Hai Basantगाओ सखी होकर मगन आया है वसंत
राजा है ये ऋतुओं का आनंद है अनंत।

पीत सोन वस्त्रों से सजी है आज धरती
आंचल में अपने सौंधी-सौंधी गंध भरती।

तुम भी सखी पीत परिधानों में लजाना,
नृत्य करके होकर मगन प्रियतम को रिझाना।

सीख लो इस ऋतु में क्या है प्रेम मंत्र
गाओ सखी होकर मगन आया है वसंत।

राजा है ऋतुओं का आनंद है अनंत
गाओ सखी होकर मगन आया है वसंत।

नील पीत वातायन में तेजस प्रखर भास्कर
स्वर्ण अमर गंगा से बागों और खेतों को रंगकर।

स्वर्ग सा गजब अद्भुत नजारा बिखेरकर
लौट रहे सप्त अश्वों के रथ में बैठकर।

हो न कभी इस मोहक मौसम का अंत
गाओ सखी होकर मगन आया है वसंत।

राजा है ऋतुओं का आनंद है अनंत
गाओ सखी होकर मगन आया है वसंत।

Chali Chali Re Patang


This song/Hindi Poem is from the Bhabhi Hindi urdu film directed by R Krishnan Raju and S Panju in 1957 starring Balraj Sahni, Pandari Bai, Nanda.


चली-चली रे पतंग मेरी चली रे..
चली बादलो के पार हो के डोर पे सवार
साड़ी दुनिया ये देख-देख जली रे
चली-चली रे पतंग ...

यू मस्त हवा मे लहराए जैसे उड़न खटोला उदा जाए..
ले के मन मे लगन जैसे कोई दुल्हन..
चली जाए सावरिया की गली रे
चली-चली रे पतंग ...

रंग मेरी पतंग का धानी है ये नील गगन की रानी..
बांकी बांकी है उड़ान है उम्र भी जवान
लागे पतली कमर बड़ी भली रे
चली-चली रे पतंग ...

छूना मत देख अकेली है साथ मे डोर सहेली..
है ये बिजली की धार बड़ी तेज़ है कतार
देगी काट के रख दिलजली रे
चली-चली रे पतंग ...

Veeron Ka Kaisa Ho Vasant - Basant Panchami Hindi poem


Here we provide classic Basant Panchami Hindi poem by Subhadra Kumari Chauhan
Subhadra Kumari Chauhan wrote mainly about Hindi poems on Veer Ras. Famous composition is Jhansi Ki Rani by Subhadra Kumari Chauhan.

आ रही हिमालय से पुकार
है उदधि गरजता बार बार
प्राची पश्चिम भू नभ अपार;
सब पूछ रहें हैं दिग-दिगन्त
वीरों का कैसा हो वसंत

फूली सरसों ने दिया रंग
मधु लेकर आ पहुंचा अनंग
वधु वसुधा पुलकित अंग अंग;
है वीर देश में किन्तु कंत
वीरों का कैसा हो वसंत

भर रही कोकिला इधर तान
मारू बाजे पर उधर गान
है रंग और रण का विधान;
मिलने को आए आदि अंत
वीरों का कैसा हो वसंत

गलबाहें हों या कृपाण
चलचितवन हो या धनुषबाण
हो रसविलास या दलितत्राण;
अब यही समस्या है दुरंत
वीरों का कैसा हो वसंत

कह दे अतीत अब मौन त्याग
लंके तुझमें क्यों लगी आग
ऐ कुरुक्षेत्र अब जाग जाग;
बतला अपने अनुभव अनंत
वीरों का कैसा हो वसंत

हल्दीघाटी के शिला खण्ड
ऐ दुर्ग सिंहगढ़ के प्रचंड
राणा ताना का कर घमंड;
दो जगा आज स्मृतियां ज्वलंत
वीरों का कैसा हो वसंत

भूषण अथवा कवि चंद नहीं
बिजली भर दे वह छन्द नहीं
है कलम बंधी स्वच्छंद नहीं;
फिर हमें बताए कौन हन्त
वीरों का कैसा हो वसंत

Rituon ki ritu Basant- Hindi Poem on Basant Panchami


This Poem on Basant Panchami is written by Sumitranandan Pant. A famous hindi poet, he wrote mostly in Sanskritized Hindi

फिर वसंत की आत्मा आई,
मिटे प्रतीक्षा के दुर्वह क्षण,
अभिवादन करता भू का मन !
दीप्त दिशाओं के वातायन,
प्रीति सांस-सा मलय समीरण,
चंचल नील, नवल भू यौवन,
फिर वसंत की आत्मा आई,
आम्र मौर में गूंथ स्वर्ण कण,
किंशुक को कर ज्वाल वसन तन !
देख चुका मन कितने पतझर,
ग्रीष्म शरद, हिम पावस सुंदर,
ऋतुओं की ऋतु यह कुसुमाकर,
फिर वसंत की आत्मा आई,
विरह मिलन के खुले प्रीति व्रण,
स्वप्नों से शोभा प्ररोह मन !
सब युग सब ऋतु थीं आयोजन,
तुम आओगी वे थीं साधन,
तुम्हें भूल कटते ही कब क्षण?
फिर वसंत की आत्मा आई,
देव, हुआ फिर नवल युगागम,
स्वर्ग धरा का सफल समागम !

Basant Panchami Short Poems in Hindi


1. Short Hindi Poem On Basant Panchami
Aasmaan Mein Udi Patang.
Dhaage Ka Pakada Sang.
Tej Hawa Ka Kaam Nahi.
Shaant Hawaa Mein Bahi Rahi.
Dhimi Mand Nahi Tej.
Taaron Tak Dije Bhej.
Chaand Ki Laaye Khabar.

2. Short Hindi Poem On Vasant Panchami
Sardi Ko Dedo Vidaayi,
Basant Ki Hai Ritu Aayi.
Hawa Saurabh Lekar Aayi,
Phulon Ne Jise Lutaayi.
Baagon Mein Bahaar Hai,
Bhaunron Ki Gunjar Hai.
Titli Ki Bharmaar Hai.

3. Basant Panchami Poem in Hindi
Udi-Udi Re Udi Patang,
Dekho Baadlon Ke Sang.
Hawa Ke Sang Baatein Karti,
Unchaayion Se Kabhi Na Darti.
Dhili Chhodoge Jab Dor,
Door Hoti Jaaye Ye Aur.
Sundar Si Iski Puchhal,
Kya Khoob Khaati Hai Bal.

Jab Patang Hai Pench Ladaati,
Ek Kate, Ek Jhat Mud Aati.
Lutane Ko Bachche Betaab,
Pichhe Daude Behisaab.

4. Basant Panchami Poems in Hindi
Mere Bhramar Man,
Ritu Basant Ka Aagman;
Kuch Is Tarah Se Ho Gaya,
Na Khile Madhufool Vitap Mein,
Tu Bina Madhu Ke Jagat Mein Rah Gaya;

Na Khili Sarson
Ye Panchhi Anmane Se Dekhkar Bagiya;
Ki Isme Thi Bahi Aisi Hawaa,
Khushbu Bikhere Jo Chaman Mein;
Neembuon Ki Manjari Se
Gungunata Woh Bhramar;
Lag Raha Jaise Subah Ka Devta Ho.