Bhagavad Gita Quotes in Hindi 2017

Bhagavad Gita Quotes In Hindi, Geeta Shlok In Hindi


Lord Krishna is the Supreme Truth, the supreme cause and sustaining force of everything that are both material and spiritual in nature. Souls who understand him surrender unto Him in devotion, whereas impious souls divert their minds to other things of worship.

Lord Krishna is the Supreme God and the supreme object of worship. The soul is eternally related to Him through transcendental devotional service (bhakti). By reviving one's pure devotion one returns to Krishna in the spiritual realm. The glories of the Bhagavad-gita, and the ultimate conclusion of the Gita: the highest path of religion is absolute, unconditional loving surrender unto Lord Krishna, which frees one from all sins, brings one to complete enlightenment, and enables one to return to Krishna's eternal spiritual abode. These are some of the beautiful quotes of Bhagvad Gita in Hindi language.

अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को  अलग कर दो. अनुशाषित रहो . उठो.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

व्यक्ति जो चाहे बन सकता है यदी वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु  पर लगातार चिंतन करे.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था ना कभी होगा.जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


ज्ञानी व्यक्ति को  कर्म के प्रतिफल की अपेक्षा कर रहे  अज्ञानी व्यक्ति के दीमाग को अस्थिर नहीं करना चाहिए.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है.जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में  देखता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


मन  अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे. सम्मानित व्यक्ति के लिए , अपमान मृत्यु से भी बदतर है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी समान हैं.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


निर्माण केवल पहले से मौजूद चीजों का प्रक्षेपण है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

नर्क के तीन द्वार हैं: वासना, क्रोध और लालच.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


इस जीवन में ना कुछ खोता है ना व्यर्थ होता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में  है ना ही कहीं और .
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

क्रोध से  भ्रम  पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है; और लगातार तुम्हे बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

हर व्यक्ति का विश्वास उसकी प्रकृति के अनुसार होता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है जितना कि मृत होने वाले के लिए जन्म लेना. इसलिए जो अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक


सभी अच्छे काम छोड़ कर बस भगवान में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाओ. मैं तुम्हे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा. शोक मत करो.
श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

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