अबूझ मुहूर्त 2025: बिना पंचांग देखे करें शुभ कार्य, जानें ये 5 खास तिथियां!

अबूझ मुहूर्त 2025: बिना पंचांग देखे करें शुभ कार्य, जानें ये 5 खास तिथियां!

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अबूझ मुहूर्त 2025: शुभ कार्यों के लिए विशेष तिथियां

अबूझ मुहूर्त वे विशेष तिथियां होती हैं जब बिना किसी ज्योतिषीय गणना के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। सामान्यत: विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, व्यापार आरंभ, वाहन खरीदने जैसे कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है, लेकिन कुछ दिन इतने पवित्र माने जाते हैं कि इन पर बिना पंचांग या ग्रह-नक्षत्र की गणना किए भी कार्य किए जा सकते हैं।

2025 के प्रमुख अबूझ मुहूर्त

बसंत पंचमी (2 फरवरी, रविवार)

बसंत पंचमी को माँ सरस्वती का पूजन किया जाता है। इसे अत्यंत शुभ तिथि माना जाता है और इस दिन विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य बिना किसी मुहूर्त के किए जा सकते हैं।

फुलेरा दूज (1 मार्च, शनिवार)

यह दिन फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है। इसे रंगों का त्योहार होली का प्रारंभ भी माना जाता है। यह अबूझ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है, खासकर उत्तर भारत में इस दिन विवाह संपन्न कराए जाते हैं।

अक्षय तृतीया (30 अप्रैल, बुधवार)

अक्षय तृतीया को "अक्षय फल देने वाला" पर्व कहा जाता है। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य स्थायी फल देने वाला माना जाता है, इसलिए इसे अबूझ मुहूर्त में गिना जाता है।

विजयादशमी (2 अक्टूबर, गुरुवार)

दशहरा के दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ होता है, और इस दिन विवाह, व्यापार, शिक्षा तथा अन्य कार्य बिना किसी ज्योतिषीय गणना के किए जा सकते हैं।

देवउठनी एकादशी (1 नवंबर, शनिवार)

देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु के चार माह के शयन के बाद जागने का दिन माना जाता है। इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है और इसे अबूझ मुहूर्त के रूप में माना जाता है।

अबूझ मुहूर्त का महत्व

अबूझ मुहूर्त को अत्यंत शुभ इसलिए माना जाता है क्योंकि इन दिनों देवगण स्वयं जागृत होते हैं और किसी भी कार्य में बाधा नहीं आती। जिन लोगों को विवाह या अन्य शुभ कार्यों के लिए विशेष मुहूर्त देखने में परेशानी होती है, वे इन तिथियों पर बिना किसी संकोच के अपने कार्य कर सकते हैं।

अबूझ मुहूर्त वे शुभ अवसर होते हैं जब बिना किसी ज्योतिषीय गणना के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। 2025 में बसंत पंचमी, फुलेरा दूज, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और देवउठनी एकादशी जैसे दिन विशेष रूप से मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त हैं। यदि आप किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो इन तिथियों को प्राथमिकता दे सकते हैं।

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